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https://youtu.be/E3pD3z7Ty2M

 

 

ट्रैक्टर ड्राइवर की सीट की डिज़ाइन और फीचर्स ड्राइवर के सुख-सांतोष और कार्य की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कुछ मुख्य विशेषताएँ ट्रैक्टर ड्राइवर सीट में शामिल हो सकती हैं:

  1. आरामदायक सीट: ट्रैक्टर ड्राइवर की सीट को आरामदायक और समर्थक बनाया जाता है, ताकि ड्राइवर लंबे समय तक काम कर सके। सीट की पैडिंग और कुशनियों का डिज़ाइन ड्राइवर के लिए आरामदायक होता है।

  2. सीट की स्थिरता: सीट को स्थिरता देने के लिए अच्छे से डिज़ाइन किया जाता है, ताकि ड्राइवर की बंदूकी क्रिया के दौरान या ट्रैक्टर की चलाने के समय सीट स्थिर रहे।

  3. ऊँचाई और डिज़ाइन: सीट की ऊँचाई और डिज़ाइन ड्राइवर के आकार और सुविधाओं के आधार पर तैयार की जाती है।

  4. सीट की सीधाई: सीट की सीधाई की बदल सकने की सुविधा होती है ताकि ड्राइवर अपनी सीट को अपने साथी ड्राइवरों के साथ समायोजित कर सके।

  5. जोड़ के रोड और स्प्रिंग: कुछ सीटों में जोड़ के रोड और स्प्रिंग होते हैं, जो ड्राइवर के बैठने के दौरान ज़रूरत के हिसाब से सीट को कम्फर्टेबल बनाते हैं।

  6. सुरक्षा फ़ीचर्स: कुछ ट्रैक्टर सीट्स में सुरक्षा फ़ीचर्स जैसे कि सीट बेल्ट या एयरबैग हो सकते हैं, जो ड्राइवर की सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं।

इन फीचर्स के साथ, ट्रैक्टर ड्राइवर को अपनी सीट का उपयोग करने में सुख-सांतोष और सुरक्षा मिलती है, जिससे वह अधिक प्रभावी रूप से काम कर सकता है।

 

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unjab Chief Minister Bhagwant Mann has approved a proposal to subsidize surface seeders under the crop residue management (CRM) scheme. A surface seeder, developed by Punjab Agricultural University, is a piece of equipment that can be attached to a combine harvester. It is used for the simultaneous operation of paddy harvesting and wheat sowing.

A pilot project for the surface seeder was conducted in Satoj, a village in Sangrur, which happens to be Bhagwant Mann's native village. The results from this pilot project were positive, and as a result, the state government has decided to include the surface seeder in the CRM scheme to provide subsidies for this equipment.

The subsidy means that the cost of the machine, which is originally Rs 80,000, will be reduced by 50%, making it more affordable for farmers. After the subsidy, the machine will cost Rs 40,000 for a farmer, which is intended to encourage the adoption of this technology and promote more efficient crop residue management practices in Punjab.